childhood poem for kids in hindi-बचपनवाली कविताये हिंदी में

childhood poem for kids in hindi-बचपनवाली कविताये हिंदी में

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childhood poem for kids in hindi-बचपनवाली कविताये हिंदी में

poem for kids in hindi – बचपन एक ऐसा समय है, जिससे हम सबसे ज्यादा खेलते, कूदते, लड़ते और मस्ती करते है। बचपन कब ख़त्म हो जाता है, इसका हमें पता ही नहीं चलता है और बचपन की यादों के साथ कुछ ऐसी कविताये होती है जिसे हम जिंदगी भर नहीं भूलते है। कुछ ऐसी कविता है जिसमे हमारे द्वारा नहीं भुलाई जा सकती है और इस हम आने पीढ़ियाँ को सुनाते है। तो आज के इस आर्टिकल में आपके के लिए कविताये (poem for kids in hindi) लेके आया हु। जिसे की आप अपने बच्चे को जो की पहली या दूसरी कक्षा में पढता हो उसे सुना सकते हो और अंत में कमेंट करके ज़रूर बातये आपको ये पोस्ट कैसी लगी।

(1).Aaloo kachaaloo beta kahaan gae the – आलू कचालू बेटा कहां गए थे

poem for kids in hindi
आलू कचालू बेटा कहाँ गए थे,
बन्दर की झोपडी में सो रहे थे,
बन्दर ने लात मारी रो रहे थे,
मम्मी ने प्यार किया हंस रहे थे,
पापा ने पैसे दिए नाच रहे थे,
भैया ने लड्डू दिए खा रहे थे….

 

(2).Titli Rani Badi Sayani – तितली रानी बड़ी सयानी

poem for kids in hindi

तितली रानी बड़ी सयानी,
रंग बिरंगे फूलों पर जाती है।
फूलों से रंग चुरा कर,
अपने पंखों को सजाती है।
कोई हाथ लगाए,
तो छूमंतर हो जाती है।
पंखों को फड़फड़ा कर,
हर फूल पर वो मंडराती है।
घूम-घूम कर सारे फूलों की,
खुशबू वो ले जाती है।
फूलों का मीठा रस पीकर,
दूर जाकर पंखों को सहलाती है।
रंग बिरंगी तितली रानी,
बड़ी सयानी।

 

(3).Saavan jab aata hai-सावन जब आता है

सावन जब आता है
खूब मजा आता है।
चारों ओर हरियाली होती
पेड़ों पर खुशियाली होती।
दादुर , मोर , पपीहा गाते
मेंढक उछलकर नाच करते।
कोयल ऊंचे तान सुनाती
घूम – घूम कर सगुन बजाती।

 

(4).Aao Hum Sab Jhula Jhule – आओ हम सब झूला झूलें

आओ हम सब झूला झूलें
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें
है बहार सावन की आई
देखो श्याम घटा नभ छाई
अब फुहार पड़ती है भाई
ठंडी – ठंडी अति सुखदायी
आओ हम सब झूला झूलें
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें
कुहू – कुहू कर गाने वाली
प्यारी कोयल काली – काली
बड़ी सुरीली भोली – भाली
गाती फिरती है मतवाली
हम सब भी गाकर झूलें
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें
मोर बोलता है उपवन में
मास्त हो रहा है नर्तन में
चातक भी बोला वन में
आओ हम सब झूला झूलें
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें

 

(5).Agale din vah jab – अगले दिन वह जब

अगले दिन वह जब
सवेरे सवेरे आती है
गंगाजल से नहा धोकर
बच्चों को भी संग लाती है
समय पर खाना मिल जाए तो
खूब गीत सुनाती है
थोड़ी सी भी देर हो जाए
घर – आंगन सिर उठा लेती है
ऐसी मेरी चिड़िया रानी
सज धज कर आती है। 

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(6).Gol Gol Lal Tamatar – गोल गोल यह लाल टमाटर

poem for kids in hindi

गोल गोल यह लाल टमाटर
होते जिससे गाल टमाटर
खून बढ़ाता लाल टमाटर
फूर्ति लाल लाल टमाटर
स्वास्थ्या बनाता लाल टमाटर
मस्त बनाता लाल टमाटर
हम खाएँगे लाल टमाटर
बन जाएँगे लाल टमाटर.

 

(7).Titalee hotee rang birangee – तितली होती रंग बिरंगी

तितली होती रंग – बिरंगी
फूलों पर घूमती डाली – डाली।
कोई लाल , कोई हरी ,होती कोई काली।
इतना कोमल इतना सुंदर
सब बच्चों लगती प्यारी।
हाथ किसी के नहीं आती
घूमती दुनिया सारी। 

 

(8).Chuk Chuk Karti Rail Gadi Aayi – छुक छुक करती रेलगाड़ी आयी

poem for kids in hindi

छुक छुक करती रेलगाड़ी आयी,
पो पो पी पी सीटी बजाती आयी,
इंजन है इसका भारी-भरकम।

पास से गुजरती तो पूरा स्टेशन हिलाती,
धमधम धमधम धमधम धमधम,
पहले धीरे धीरे लोहे की पटरी पर चलती।

फिर तेज गति पकड़ कर छूमंतर हो जाती,
लाल बत्ती पर रुक जाती,
हरी बत्ती होने पर चल पड़ती।

देखो देखो छुक छुक करती रेलगाड़ी,
काला कोट पहन टीटी इठलाता,
सबकी टिकट देखता फिरता।

भाग भाग कर सब रेल पर चढ जाते,
कोई टूट न पाए इसलिए,
रेलगाड़ी तीन बार सीटी बजाती।

(9).Roj subah – रोज सुबह 

रोज सुबह सूरज आसमान में आकर,
हम सबको नींद से जगाता है।

शाम हुई तो लाली फैलाकर,
अपने घर को चला जाता है।

दिन भर खुद को जला जलाकर,
यह प्रकाश फैलाता है।

कभी नहीं करता आलस्य,
रोज नियम से समय पर आता जाता।

कभी नहीं करता है घमंड,
बादलों के संग भी लुकाछिपी खेलता है।

उसका जीना ही जीना है,
जो काम सभी के आता है।

 

(10).DeKho Kalu Madari Aaya – देखो देखो कालू मदारी आया

देखो देखो कालू मदारी आया,
संग में अपनी बंदरिया लाया।

डम डम डम डम डमरू बजाया,
यह देख टप्पू चिंटू-पिंटू आया।

सुनीता पूजा बबीता आयी,
देखो देखो कालू मदारी आया।

फिर जोर-जोर से मदारी ने डमरू बजाया,
बंदरिया ने उछल कूद पर नाच दिखाया।

उल्टा पुल्टा नाच देख कर सब मुस्कुराए,
फिर सब ने जोर-जोर से ताली बजाई।

देखो देखो कालू मदारी आया,
संग में अपनी बंदरिया लाया।

Conclusion

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